यूँ न मिल मुझसे खफा

यूँ न मिल मुझसे खफा हो जैसे
साथ चल मौज-ऐ-सबा हो जैसे
लोग यूँ देख हंस देते है
तू मुझे भूल गया हो जैसे!

इश्क को शिर्क की हद तक न बढ़ा
यूँ न मिल मुझसे खफा हो जैसे
मौत भी आए तो इस नाज़ के साथ
मुझपे एहसान किया हो जैसे!

ऐसे बना बैठा है तुझको
कुछ भी पता न हो जैसे
हिचकियाँ रात को आती रही
तुने फिर याद किया हो जैसे…..

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