आदिन को घुट घुटकर मरना सिखा गया

मुझे  मिलकर  खाख  में  वादा  निभा  गया
दर्द  में  भी  मुझे  हसने  की  अदा  सिखा  गया

फिर  कभी  मिले  जो  राहे-ऐ-सफ़र में  कहीं
देखकर  मुझको  वो  अपनी  नजरे  चुरा  गया

आँखों  का  सूनापन  उससे  देखा  न  गया
शायद  ये  सोचकर  मुझे  रोना  सिखा  गया

तनहा  यूँ  बड़ा  मुश्किल  था  सफ़र  जिंदगी  का
आदिन  को  घुट  घुटकर  मरना  सिखा  गया

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